अटलांटिक महासागर के नितल उच्चावच का वर्णन

अटलांटिक महासागर के नितल उच्चावच का वर्णन- अटलांटिक महासागर का कुल क्षेत्रफल 8,24,63,800 वर्ग किलोमीटर हैl इस प्रकार इसका क्षेत्रफल प्रशांत महासागर के क्षेत्रफल से आधा है और यह विश्व के 1/6 भाग पर फैला हुआ है यह उत्तर में ग्रीनलैंड से लेकर दक्षिण में अंटार्कटिका महासागर तक फैला हुआ है इसका आकार अंग्रेजी के अक्षर ‘S’ ( एस ) जैसा है इसके पश्चिम में उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पूर्व में यूरोप एवं अफ्रीका हैl यह महासागर भूमध्य रेखा के पास संकरा है अफ्रीका का लाबेरिया तट ब्राजील के साओराक अंतरीप से केवल 2600 किमी दूर है. और 40° उत्तरी अक्षांश पर यह महासागर 4800 किमी चौड़ा हो जाता हैl परंतु उत्तर में यह पुनः संकरा हो जाता है जहां पर नार्वेजियन सागर, डेनमार्क जलडमरूमध्य द्वारा इसका संबंध आर्कटिक सागर से हो जाता है जबकि दक्षिण में अंध महासागर सर्वाधिक चौडा है 35° दक्षिणी अक्षांश पर इसकी पूर्व- पश्चिम चौड़ाई 5920 कि मी हैl

महाद्वीपीय मग्नतट : अटलांटिक महासागर में अन्य किसी महासागर की अपेक्षा अधिक महाद्वीप मग्नतट उपस्थित हैl यह अंध महासागर के 13.3 % भाग पर स्थित है यह लगभग सभी तटो के पास फैला हुआ हैl जहां तट के समीप पर्वतीय प्रदेश है वहां पर महाद्वीपीय मन्नतट कम चौड़ा है जैसे बिस्के की खाड़ी से आशा अंतरीप तक तथा ब्राजील में 5- 10 डिग्री दक्षिणी अक्षांशों के बीच यहां मग्नतट की चौड़ाई 90- 160 किमी हैl इसके विपरीत उत्तरी अमेरिका के उत्तर- पूर्व तथा उत्तर पश्चिम यूरोप के तट के समीप मग्नतट 240- 400 किलोमीटर चौड़ा हैl

मध्य महासागरीय कटक : अंध महासागर के नितल उच्चावच से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यहां का मध्य सागरीय कटक हैl सबसे पहले इसकी खोज सन 1873 में चैलेंज द्वारा की गई थीl अंध महासागर की भांति यह कटक भी ‘S’ ( एस ) आकार का है यह उत्तर के आइसलैंड से दक्षिण में बोवेट द्वीप तक लगभग 14,400 किमी लंबाई में फैला हुआ है अंध महासागर कटक भूमध्य रेखा के निकट 4152 फैदम गहरी रोमांश गर्त इसे दो भागों में बाँटता है इसके उत्तरी भाग को डॉल्फिन श्रेणी तथा दक्षिण भाग को चैलेंज श्रेणी कहते हैंl मध्य अटलांटिक कटक की उत्पत्ति के विषय में पर्याप्त मतभेद है परंतु महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के अनुसार इस कटक की उत्पत्ति तनाव के कारण तथा उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के पश्चिम दिशा में प्रवाह के कारण मानी जाती है

द्रोणी : मध्यवर्ती अटलांटिक कटक द्वारा आंध्र महासागर को दो विस्तृत श्रेणियों में विभाजित हो जाता हैl इन दो वृहद द्रोनियों में पुनः कई छोटी-छोटी द्रोनिया भी पाई जाती है जैसे लैब्राडोर द्रोणी, उत्तरी अमेरिका द्रोणी, ब्राजील द्रोणी, स्पेनिश द्रोणी, उत्तर तथा दक्षिण कनारी बेसिन, केपवर्ड द्रोणी, गायना द्रोणी, अंगोला द्रोणी, केप बेसिन तथा अंगूलहास द्रोणी आदि.

महासागरीय गर्त : मरे के अनुसार अंध महासागर में 19 गर्त है जिनकी गहराई तीन हजार फैदम से अधिक है 7000 मीटर से अधिक गहरे गर्त केवल दो ही है इस महासागर की सबसे गहरी गर्त प्युर्टोरिको गर्त है दूसरा सैंडविच गर्त है इसके अतिरिक्त रोमांश गर्त, केमन गर्त, नरेस गर्त, मोसले गर्त, भी इस महासागर में विद्यमान हैl अटलांटिक महासागर के नितल उच्चावच का वर्णन

अटलांटिक महासागर के नितल उच्चावच का वर्णन
अटलांटिक महासागर के नितल उच्चावच का वर्णन

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