पृथ्वी की आंतरिक संरचना

पृथ्वी की आंतरिक संरचना पृथ्वी की उत्पत्ति की भांति पृथ्वी की आंतरिक संरचना भी मनुष्य के लिए एक पहेली बनी हुई है l इसका कारण यह है कि हम पृथ्वी के अंदर अधिक गहराई तक जाकर स्वयं अपनी आंखों से नहीं देख सकते हैंl  यद्यपि पृथ्वी का आंतरिक भाग भूगोल के अध्ययन के क्षेत्र से

कोपेन का जलवायु वर्गीकरण

कोपेन का जलवायु वर्गीकरण – जर्मनी के वनस्पति विज्ञानी तथा जलवायु विज्ञानवेत्ता ब्लादिमीर कोपेन ने सर्वप्रथम 1918 में विश्व की जलवायु का वर्गीकरण प्रस्तुत किया. इसका 1931 ई में संशोधन किया तथा 1936 ई. में इसका अंतिम रूप प्रस्तुत किया. कोपेन का जलवायु वर्गीकरण औसत वार्षिक एवं मासिक तापमान तथा वर्षा पर आधारित है कोपेन

वेगनर का महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत ( वेगनर का सिद्धांत )

वेगनर का महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत – अल्फ्रेड वेगनर जर्मनी के एक प्रसिद्ध जलवायुवेत्ता तथा भूशास्त्रवेत्ता थे. वेगनर ने अपने सिद्धांत ( वेगनर का महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत ) का प्रतिपादन 1912 में किया. महासागरों की तली तथा महाद्वीपों के स्थिरता की संकल्पना को गलत प्रमाणित करने के लिए वेगनर ने अपना प्रतिस्थापन परिकल्पना का प्रतिपादन किया.

नदी द्वारा निर्मित स्थलाकृति

नदी द्वारा निर्मित स्थलाकृति

नदी द्वारा निर्मित स्थलाकृति –  V आकार की घाटी, गार्ज, कैनियन, जलप्रपात, क्षिप्रिका, जल गर्तिका, संरचनात्मक सोपान, नदी वेदिका, नदी विसर्प, समप्राय मैदान, तथा नदी निक्षेपण द्वारा निर्मित स्थलाकृतिया जिसमे जलोढ़ पंख, जलोढ़ शंकु, तटबंध, गोखुर झील, डेल्टा आदि – भूतल पर समतल स्थापक बलों में बहते हुए जल का कार्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है. वर्षा

डेविस का अपरदन चक्र सिद्धांत ( डेविस का भौगोलिक चक्र )

डेविस ने 1889 में भौगोलिक चक्र की संकल्पना का प्रतिपादन किया ( डेविस का भौगोलिक चक्र सिद्धांत ) तथा बताया कि भौगोलिक चक्र समय कि वह अवधि है जिसके अंतर्गत उत्थित भूखंड अपरदन के प्रक्रम द्वारा प्रभावित होकर एक आकृतिविहीन समतल मैदान में बदल जाता है इस तरह डेविस ने स्थलरूपों के विकास में चक्रिय

कोबर का भूसन्नति सिद्धांत

जर्मन विद्वान कोबर ने वलित पर्वतों की उत्पत्ति के लिए भूसन्नति सिद्धांत का प्रतिपादन किया. वास्तव में उनका प्रमुख उद्देश्य प्राचीन दृढ़ भूखंडों तथा भुसन्नतियों में संबंध स्थापित करना था कोबर ने इस तरह अपने भूसन्नति सिद्धांत के आधार पर पर्वत निर्माण की क्रिया को समझाने का भरकस प्रयास किया है यह सिद्धांत संकुचन शक्ति

वायु द्वारा निर्मित स्थलाकृति ( पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृति )

वायु द्वारा निर्मित स्थलाकृति

वायु द्वारा निर्मित स्थलाकृति – वातगर्त, छत्रक शिला – गारा, इन्सेलबर्ग ( insellberg ), यारदंग, भू- स्तंभ ( Demoiselles ), ज्यूजेन ( zeugen ), त्रिकोणक ( Driekenter ),पुल तथा खिड़की, पवन का निक्षेपण कार्य ( वायु द्वारा निर्मित स्थलाकृति ),   लोयस, बालुका स्तूपो, अपरदन के अन्य कारकों के समान पवन भी अपरदन तथा निक्षेपन का

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